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Tuesday, November 13, 2012

काश, पटाखों के साथ मंहगाई जल जाए



25 रुपये किलो आलू यानी दूना दाम

10 रुपये में मिर्चा 100 ग्राम

मोमबत्ती 210 रुपये किलो

दाल 90 रुपये

सरसों का तेल 110 में

इस दिवाली दोस्तों, मैंने बच्चों को कपडे नहीं दिलाये

500 ग्राम आफिस से मिली, 500 ग्राम बाज़ार से खरीदी

पत्नी जिद कराती रहीं लेकिन

सजावट के लिए झालर नहीं आई

दोस्तों इस दीवाली दीप जलाते समय लगा

दिल भी जल रहा है.

रोटी, दाल, दूध और सब्जी, बच्चों की फीस

वेतन तो ऐसे उडता है जैसे कलाई से इत्र

प्रधानमंत्री मनमोहन अपनी पीठ लाख ठोंकें

1999 में 1500 वेतन पाता था, ज्यादा खुश था

2012 में 19000 महीने के अंत तक

गूलर का फूल हो जाता है

हे सरकार, तुम्हारा सर्वनाश हो

हमारे दिल की आह तुमको लगे

नेताओं तुम्हारे हाथ में लोहे की जंजीरे हो

विश्वबैंक के इशारों पर चलने वाले

तुमको अंत समय कंधे न मिले

सोचता हूँ,

विधवा, निरीह, विकलांग कैसे पीते होंगे पसावन दाल की जगह

गरीबो की रोटी कैसे पकती होगी

इस मनमोहन युग में


-रोशन प्रेमयोगी