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Monday, April 26, 2010

भारत के बूढ़े होने की चिंता

देश भी सपने देखता है

देश के भी आँखें होती हैं

देश भी महत्वकांछाएं पालता है

देश में भी जीतने का जज्बा होता है

देश के भी सीने में दिल धड़कता है

देश भी खुश होने पर ठठाकर हँसता है

देश भी हारने पर दुखी होता है

यह सारे गुण और संवेदनाएं मुझे भारत में दिखती हैं

भारत एक नौजवान देश है

भारत के पास अपार प्रतिभाएं हैं

भारत एक मजबूत राष्ट्र है

भारत किसी हिमालय की तरह ऊँचा है

भारत किसी सागर की तरह गहरा है

भारत किसी भीम की तरह बलवान है

भारत किसी रावण की तरह बुद्धिमान है

भारत किसी महात्मा गाँधी की तरह सादगी पसंद है

भारत किसी राम मनोहर लोहिया की तरह अन्तोदय की सोचता है

भारत किसी तेंदुलकर की तरह महान है

भारत किसी विवेकानंद की तरह स्वप्नदर्शी है

लेकिन

भारत का नेतृत्व अतीत्जीवियों के हाथों में है

भारत लम्पट नेताओं को अपने कंधे से उतार नहीं पा रहा है

भारत संसद के इर्द-गिर्द फैली गन्दगी को साफ़ नहीं कर पा रहा है

सच और झूठ का घोल भांग की तरह पी रहा है राजनेता

चोरी करने पर वह जार-जार रोता है राष्ट्रभक्त होने का दावा करते हुए

इमानदारी दिखाने पर मूसक बन जाता है

मुझे कहना है भंग कर दो भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को

इंडियन प्रिमिएर लीग को दे दो क्रिकेट की जिम्मेदारी

भंग कर दो राजनीतिक दलों को

एक बार लड़ने दो राजनितिक दलों के युवा संगठनों को चुनाव

फार्मेट करना जरूरी है नेतृत्व के कम्पूटर को

अन्न गोदामों में है लेकिन आम आदमी भूखा है

संसाधन अपार हैं

लेकिन लाखों युवा बेरोजगार हैं

शेयर बाज़ार के चढ़ने से क्या होता है मनमोहन सिंह जी

जब गर्भवती महिलाओं को नहीं मिल रही हरी सब्जी और

आयरन की गोली

बच्चों को नहीं मिल रहे खिलौने

और मुझे नहीं आ रही रात में नींद और दिन में चैन

सता रही है बिना जवान हुए

भारत के बूढ़े होने की चिंता

-रोशन प्रेमयोगी

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