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Saturday, March 9, 2013

जिस दिन पहाड़ की दूबों को सब जगह बोऊँगा मैं

बंदरों की तरह उत्पात कर रहे हो रोज


क्यारियों में लगे मेरे फूलों को तोड़ देते हो

वाइरस की तरह घुस जाते हो अब गाँव में भी

गलियों में टंगे मेरे अमन के पोस्टर फाड़ देते हो

कैसे नफ़रत फैलायेंगे तुम्हारी साजिशों के साये

बताओ जिस दिन प्यार का आसमान तान दूंगा मैं

कैसे बच पाएंगे तुम्हारी रासायिनिक खादों से बने उसर-बंजर

बताओ जिस दिन पहाड़ की दूबों को सब जगह बोऊँगा मैं

-रोशन प्रेमयोगी

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