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Saturday, October 2, 2010

आश्चर्य गाँधी बचे हुए थे

आश्चर्य गाँधी बचे हुए थे
आज देखा सड़क पर
एक मरी हुई तितली
तितली कहीं नहीं थी
केवल रंग बिरंगे पंख बचे हुए थे
महात्मा गाँधी के विचारों की तरह
साईकिल, मोटरसाईकिल, कार और बसों से
लोग कुचलते हुए निकल रहे थे
आश्चर्य, रंग बिरंगे पंख फिर भी बचे हुए थे
महात्मा गाँधी के विचारों की तरह
-रोशन प्रेमयोगी

1 comment:

  1. बापू! मै भारत का वासी, तेरी निशानी ढूंढ रहा हूँ.
    बापू! मै तेरे सिद्धान्त, दर्शन,सद्विचार को ढूंढ रहा हूँ.
    सत्य अहिंसा अपरिग्रह, यम नियम सब ढूंढ रहा हूँ.
    बापू! तुझको तेरे देश में, दीपक लेकर ढूंढ रहा हूँ.

    कहने को तुम कार्यालय में हो, न्यायालय में हो,
    जेब में हो, तुम वस्तु में हो, सभा में मंचस्थ भी हो,
    कंठस्थ भी हो, हो तुम इतने ..निकट - सन्निकट...,
    परन्तु बापू! सच बताना आचरण में तुम क्यों नहीं हो?

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