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Monday, January 25, 2010

लोकतंत्र जाग रहा है

चुप रहते थे हमारे बाबूजी
दादाजी की तरह
नेता जी आते थे सिर्फ यह कहने
इस निशान पर मुहर लगाना
मैंने बोलना शुरू किया
सवाल करता हूँ वोट मांगने वालों से
मेरे बाद की पीढ़ी हिसाब मांगेगी
एक-एक योजना का
अपने इनकम टैक्स का
देश जाग रहा है
युआ जाग रहा है
लोकतंत्र जाग रहा है
सोने वाले नेताओं'
तुम भी जाग जाओ
-रोशन प्रेमयोगी

3 comments:

  1. bahut hi badiya sir
    do check out
    www.simplypoet.com
    World's first multi- lingual poetry portal!!

    do login and post...takki sabhi ko aapki khoobsurat karigari padne
    ka mauka miley ..aur logon ko pata chalee ke aapke jaise kavi abhi tak blogging karte hain!!

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  2. सारे युवा जल्दी जागें मेरी तो यही दुआ है.

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